एता मनोरथमयीर्हान्यस्योच्चावचास्तनू: ।
गुणसङ्गादुपादत्ते क्वचित् कश्चिज्जहाति च ॥ ४८ ॥
अनुवाद
यद्यपि भौतिक शरीर आत्मा से भिन्न है, लेकिन भौतिकता से जुड़े अज्ञान के कारण मनुष्य उच्च और निम्न शारीरिक स्थितियों के साथ झूठा तादात्म्य करता है। कभी-कभी सौभाग्यशाली व्यक्ति इस तरह की मानसिक कल्पनाओं को छोड़ने में सक्षम होता है।
Although the physical body is distinct from the soul, ignorance caused by material association causes man to falsely identify himself with higher and lower bodily states. Sometimes a fortunate person is able to abandon such a conception.
तात्पर्य
जिसे परम प्रभु की विशेष कृपा प्राप्त हुई है वह शारीरिक समता के मानसिक विस्तार को त्याग देता है। इस प्रकार जन्म और मृत्यु के चक्र से बचने का एक मौका हमेशा बना रहता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥