जिस तरह स्वप्न या दिवास्वप्न में मनुष्य अपने पिछले स्वप्नों या दिवास्वप्नों को याद नहीं रख पाता, उसी प्रकार वर्तमान शरीर में स्थित मनुष्य अपने सोचता है कि वह अभी हाल ही में उत्पन्न हुआ है, जबकि वह इसके पहले भी विद्यमान था।
Just as a person experiencing a dream or daydream cannot remember his previous dreams or daydreams, so a person in his present body, despite having existed before this, thinks that he was born just recently.
तात्पर्य
इस पर आपत्ति की जा सकती है कि कई बार स्वप्न का अनुभव करते समय व्यक्ति वास्तव में एक पूर्व स्वप्न को याद करता है | श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर उत्तर देते हैं कि जाति-स्मृति की रहस्यमय शक्ति से व्यक्ति अपने पिछले शरीर को याद रख सकता है और जैसा कि विख्यात है"अपवाद से नियम की स्थापना होती है |" सामान्यतः बद्ध आत्माएँ अपने पिछले अस्तित्व को नहीं देख पाती हैं | वे सोचते हैं "मैं छः वर्ष का हूँ " या "मैं तीस वर्ष का हूँ " और "इस जन्म के पहले मेरा कोई अस्तित्व नहीं था|" इस तरह के भौतिक अज्ञान से व्यक्ति आत्मा की वास्तविक स्थिति को नहीं समझ पाता है |
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥