श्रीभगवानुवाच
युक्तं च सन्ति सर्वत्र भाषन्ते ब्राह्मणा यथा ।
मायां मदीयामुद्गृह्य वदतां किं नु दुर्घटम् ॥ ४ ॥
अनुवाद
भगवान कृष्ण ने उत्तर दिया: चूँकि सारे तत्त्व हर जगह उपस्थित रहते हैं इसलिए यह उचित ही है कि विभिन्न विद्वान ब्राह्मणों ने उनकी व्याख्या भिन्न-भिन्न विधियों से की है। ऐसे सभी दार्शनिकों ने मेरी चमत्कारिक शक्ति के आश्रय में ही ऐसा कहा है, अतः वे सत्य का खण्डन किये बिना कुछ भी कह सकते हैं।
Lord Krishna replied: Since all the elements are present everywhere, it is logical that different learned brahmanas have interpreted them in different ways. All such philosophers have said so by resorting to my yogic powers, so they can say anything without contradicting the truth.
तात्पर्य
इस श्लोक में आए शब्द शांति सर्वत्र इस ओर संकेत करते हैं कि सभी भौतिक तत्व एक दूसरे के भीतर स्थूल और सूक्ष्म रूपों में मौजूद हैं। इस तरह से उनकी वर्गीय रूप से वर्णन करने के असंख्य तरीके हैं। भौतिक दुनिया अंततः भ्रामक है, लगातार परिवर्तन को झेल रही है। इसे विभिन्न तरीकों से मापा जा सकता है, जैसे जिस प्रकार किसी मरुस्थल में दिखने वाले जल के भ्रम का वर्णन विभिन्न तरीकों से किया जा सकता है, लेकिन उन अट्ठाइस तत्वों का भगवान द्वारा किया गया विश्लेषण पूर्ण है और उसे स्वीकार किए जाने लायक है। श्रील जीव गोस्वामी कहते हैं कि इस श्लोक में आने वाला शब्द माया का उल्लेख महा-माया या अज्ञान की शक्ति से नहीं है, बल्कि भगवान की अगम्य रहस्यमय शक्ति से है, जो वैदिक ज्ञान के विद्वान अनुयायियों को आश्रय देती है। यहाँ उल्लिखित प्रत्येक दार्शनिक सत्य के एक विशेष पहलू को उजागर करता है और उनके सिद्धांत विरोधाभासी नहीं हैं, क्योंकि वे केवल एक ही घटना का वर्णन विभिन्न वर्गीकरण प्रणालियों के साथ कर रहे हैं। भौतिक दुनिया के भीतर ऐसा दार्शनिक मतभेद अंतहीन है; इसलिए इस श्लोक में बताए गए अनुसार, सभी को भगवान के अपने मत के मंच पर एकजुट होना चाहिए। इसी तरह, भगवद्-गीता में भगवान कृष्ण सभी बद्ध आत्माओं से अनुरोध करते हैं कि वे अपने विभिन्न प्रकार की उपासना छोड़ दें और पूर्ण कृष्ण चेतना में उनको आत्मसमर्पण कर दें, उनके भक्त बन जाएँ। इस प्रकार, सम्पूर्ण ब्रह्मांड हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे / हरे राम, हरे राम, राम राम, हरे हरे का जाप करके ईश्वर के प्रेम में एकजुट हो सकता है। भगवान द्वारा खुद को एक निष्ठावान भक्त के सामने प्रकट करके, विश्लेषणात्मक दर्शन का विवाद समाप्त हो जाता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥