श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 22: भौतिक सृष्टि के तत्त्वों की गणना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  11.22.38 
ध्यायन् मनोऽनु विषयान् द‍ृष्टान् वानुश्रुतानथ ।
उद्यत् सीदत् कर्मतन्त्रं स्मृतिस्तदनु शाम्यति ॥ ३८ ॥
 
 
अनुवाद
कामनाओं से प्रेरित कर्मों के फलों में बँधा हुआ मन हमेशा उन इन्द्रिय-विषयों पर ध्यान लगाता है, जो इस दुनिया में दिखाई देते हैं और उन विषयों पर भी जो वैदिक विद्वानों से सुने जाते हैं। परिणामस्वरूप, मन अपनी अनुभूतियों की वस्तुओं के साथ उत्पन्न और विनष्ट होता हुआ प्रतीत होता है। इस प्रकार, अतीत और भविष्य में अंतर करने की इसकी क्षमता लुप्त हो जाती है।
 
The mind bound by the fruits of fruitive actions always meditates on the sense-objects which are seen in this world and also on those which are heard from the Vedic scholars. As a result the mind seems to arise and perish along with the objects of its perception. Thus its ability to distinguish between past and future is lost.
तात्पर्य
कोई यह पूछ सकता है कि सूक्ष्म शरीर या मन किस प्रकार से एक भौतिक शरीर से संबंध छोड़कर दूसरे में प्रवेश करता है? भौतिक शरीर में प्रवेश और शरीर को त्यागने को बद्ध आत्माएं जन्म और मत्यु कहती हैं। कोई अपने वर्तमान इन्द्रियों का उपयोग कर इस संसार की दृश्यमान वस्तुओं का ध्यान करता है - सुंदर स्त्री, राजसी संपत्ति इत्यादि - और इसी तरह स्वर्ग ग्रहों के विषय में कल्पना करता है जिसका वर्णन वेदों में मिलता है। जैसे ही मृत्यु घटित होती है, मन अपने तत्कालीन अनुभव की वस्तुओं से खिंचकर एक दूसरे शरीर में प्रवेश कर जाता है ताकि इन्द्रियों से अनुभव की जाने वाली वस्तुओं के एक नए समुच्चय का अनुभव कर सके। जैसे ही मन पूर्णतः पुनर्गठन से गुजरता है, उस समय पूर्व की मानसिकता का प्रत्यक्ष ह्रास होता है और एक नए मन का निर्माण होता है, यद्यपि वास्तव में वही मन अनुभव करता है, लेकिन भिन्न ढंग से।

बद्ध आत्मा निरंतर भौतिक अनुभव के प्रवाह के कारण व्याकुल हो जाती है जिसमें सीधी प्रत्यक्षता और इस संसार की वस्तुओं के सार संकल्पना शामिल होती है। इस प्रकार वह भगवान के साथ अपने संबंध की अपनी आध्यात्मिक स्मृति को खो देती है। जैसे ही कोई इस संसार के साथ तादात्म्य करता है, वह अपनी शाश्वत पहचान को भूल जाता है और माया द्वारा निर्मित मिथ्या अहंकार को समर्पित कर देता है।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)