श्री उद्धव ने कहा: हे परमेश्वर, निश्चित रूप से कर्मकांडी लोगों की बुद्धि आपसे दूर हो जाती है। कृपा करके यह समझाएँ कि कैसे ऐसे लोग अपने भौतिकवादी कामों से श्रेष्ठ और निम्न शरीर को स्वीकार करते हैं और फिर उन शरीरों का त्याग कर देते हैं? हे गोविंद, यह विषय मूर्खों के समझ में आने वाला नहीं है। वे इस दुनिया में माया के धोखे से ठगे जाने पर भी इस तथ्य को नहीं समझ पाते।
Sri Uddhava said: O Supreme Lord, the intelligence of those who perform selfish actions is certainly turned away from You. Therefore, kindly explain how such people, by their materialistic activities, take higher and lower bodies and then abandon them? O Govinda, this subject is beyond the understanding of the foolish. They are not able to realize this fact even though they are deceived by Maya in this world.
तात्पर्य
भगवान के विज्ञान को समझे बिना कोई भी व्यक्ति बुद्धिमान नहीं माना जा सकता है, जिसमें उनके साथ अपने शाश्वत संबंध को भूल जाने वालों के नकारात्मक परिणामों का वर्णन शामिल है। दुनिया में कई तथाकथित बुद्धिमान व्यक्ति हैं, लेकिन खुद को सबसे बुद्धिमान समझने के बावजूद, वे आम तौर पर भगवान की सर्वोच्च बुद्धि के सामने आत्मसमर्पण नहीं करते हैं। इस प्रकार वे प्रकृति के गुणों में अपनी स्थिति के अनुसार विभिन्न प्रकार के दर्शन तैयार करते हैं। हालाँकि, उसी मायावी प्रकृति से उत्पन्न दर्शन के माध्यम से भौतिक प्रकृति के प्रभाव से कोई नहीं बच सकता। मुक्ति आध्यात्मिक मंच, भगवान के राज्य से आने वाले पूर्ण ज्ञान द्वारा प्राप्त की जाती है। भगवान कृष्ण और उनके अधिकृत प्रतिनिधियों से ईमानदारी से सुनने से व्यक्ति आसानी से मुक्ति प्राप्त कर सकता है और वापस घर, वापस भगवान के पास जा सकता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥