दार्शनिकों की वह काल्पनिक बहस कि, "यह जगत सत्य है या नहीं सत्य है" परमात्मा के अधूरे ज्ञान पर आधारित है और मात्र भौतिक द्वैत को समझने भर के लिए है। यद्यपि इस प्रकार का विवाद व्यर्थ है, लेकिन जो व्यक्ति अपने वास्तविक आत्म रूप से, मुझसे ध्यान हटा लेते हैं वे इसे त्याग पाने में असमर्थ होते हैं।
The imaginary debate of philosophers, “This world is true, or this world is not true” is based on an incomplete knowledge of God and is only meant to understand the material duality. Although such debate is futile, those who have turned their attention away from Me, their real Self, are unable to give it up.
तात्पर्य
यदि कोई परमेश्वर व्यक्तित्व के अस्तित्व पर संदेह करता है, तो वह अनिवार्य रूप से प्रभु की सृष्टि की वास्तविकता पर संदेह करेगा। इस प्रकार, भगवान कृष्ण को समझे बिना, भौतिक जगत की वास्तविकता और अवास्तविकता पर केवल तर्क और वाद-विवाद व्यर्थ हैं। भौतिक जगत विशेष रूप से वास्तविक है क्योंकि यह परम वास्तविकता से निकला है, भगवान कृष्ण। भगवान कृष्ण की वास्तविकता को समझे बिना कोई भी निश्चित रूप से उनकी रचना की वास्तविकता का पता नहीं लगा सकता; वह हमेशा सोचता रहेगा कि क्या वह वास्तव में कुछ देख रहा है या केवल सोच रहा है कि वह देख रहा है। भगवान का आश्रय लिए बिना इस प्रकार की अटकलें कभी हल नहीं हो सकतीं और इसलिए बेकार हैं। प्रभु के भक्त इस तरह के तर्क के इच्छुक नहीं हैं, क्योंकि वे वास्तव में आध्यात्मिक ज्ञान में आगे बढ़ रहे हैं और कृष्ण चेतना के अपने उत्तरोत्तर अधिक सुंदर अनुभव से पूरी तरह संतुष्ट हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥