श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 22: भौतिक सृष्टि के तत्त्वों की गणना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  11.22.23 
तद्वत् षोडशसङ्ख्याने आत्मैव मन उच्यते ।
भूतेन्द्रियाणि पञ्चैव मन आत्मा त्रयोदश ॥ २३ ॥
 
 
अनुवाद
सोलह तत्वों को गिनते समय, पिछले सिद्धांत से सिर्फ़ एक अंतर यह है कि आत्मा की पहचान मन से कर ली जाती है। अगर हम पांच भौतिक तत्वों, पांच इंद्रियों, मन, व्यक्तिगत आत्मा और सर्वोच्च भगवान की कल्पना करें, तो तत्वों की संख्या तेरह हो जाती है।
 
On counting the sixteen elements, the only difference from the previous theory is that the soul is identified with the mind. If we imagine five physical elements, five senses, mind, soul and God, then the number of elements becomes thirteen.
तात्पर्य
तेरह तत्वों के सिद्धांत के अनुसार, इंद्रियों की वस्तुएं - सुगंध, स्वाद, रूप, स्पर्श और ध्वनि - इंद्रियों और भौतिक पदार्थ की सहभागिता का उपोत्पाद माना जाता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)