श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 22: भौतिक सृष्टि के तत्त्वों की गणना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  11.22.15 
श्रोत्रं त्वग्दर्शनं घ्राणो जिह्वेति ज्ञानशक्तय: ।
वाक्पाण्युपस्थपाय्वङ्‍‍घ्रि: कर्माण्यङ्गोभयं मन: ॥ १५ ॥
 
 
अनुवाद
हे उद्धव, श्रवण, स्पर्श, दृष्टि, गंध रौर स्वाद—ये पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ हैं और वाणी, हाथ, जननेन्द्रिय, गुदा और पाँव—ये पाँच कर्मेन्द्रियाँ हैं। मन इन दोनों वर्गों में आता है।
 
O Uddhava, hearing, touch, sight, smell and taste – these are the five sense organs and speech, hands, genitals, anus and feet – these are the five action senses. Mind comes in both these categories.
तात्पर्य
इस पद्य में ग्यारह तत्वों का वर्णन किया गया है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)