हे उद्धव, श्रवण, स्पर्श, दृष्टि, गंध रौर स्वाद—ये पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ हैं और वाणी, हाथ, जननेन्द्रिय, गुदा और पाँव—ये पाँच कर्मेन्द्रियाँ हैं। मन इन दोनों वर्गों में आता है।
O Uddhava, hearing, touch, sight, smell and taste – these are the five sense organs and speech, hands, genitals, anus and feet – these are the five action senses. Mind comes in both these categories.
तात्पर्य
इस पद्य में ग्यारह तत्वों का वर्णन किया गया है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥