शब्द असौवीर उन स्थानों को इंगित करता है जहां सुवीर, सम्मानीय संत व्यक्ति नहीं रहते। आम तौर पर, जो व्यक्ति राज्य के कानूनों का पालन करता है उसे एक सम्मानित नागरिक माना जाता है। उसी तरह, जो व्यक्ति ईश्वर के कानून का सख्ती से पालन करता है उसे एक संस्कारी या सभ्य व्यक्ति, सुवीर माना जाता है। जिस स्थान पर ऐसे बुद्धिमान व्यक्ति रहते हैं उसे सौवीर कहा जाता है। कीकट आधुनिक बिहार राज्य को संदर्भित करता है, जिसे पारंपरिक रूप से असभ्य पुरुषों के क्षेत्र के रूप में जाना जाता रहा है। हालाँकि, ऐसे प्रांतों में भी, कोई भी स्थान जहाँ साधु-संत इकट्ठा होते हैं, उसे पवित्र माना जाता है। दूसरी ओर, आम तौर पर सम्मानित व्यक्तियों का एक प्रांत पापी लोगों की मौजूदगी से तुरंत प्रदूषित हो जाता है। असंस्कृत का अर्थ बाहरी सफाई की कमी है, साथ ही आंतरिक सफाई के लिए शुद्धिकरण समारोहों की अनुपस्थिति है। श्रील माधवाचार्य स्कंद पुराण से उद्धृत करते हैं: "धार्मिक लोगों को नदियों, महासागरों, पहाड़ों, आश्रमों, जंगलों, आध्यात्मिक शहरों या उन स्थानों के आठ मील के दायरे में रहना चाहिए जहाँ शालिग्राम-शिला पाई जाती है। अन्य सभी स्थानों पर कीकट या दूषित माना जाना चाहिए। लेकिन अगर ऐसी दूषित जगहों में भी काले और चित्तीदार मृग पाए जाते हैं, तो व्यक्ति वहाँ तब तक रह सकता है जब तक कि पापी लोग भी मौजूद न हों। अगर पापी लोग मौजूद भी हैं, अगर नागरिक शक्ति सम्मानित अधिकारियों के हाथ में है, तो व्यक्ति रह सकता है। इसी तरह, व्यक्ति जहाँ भी विष्णु की मूर्ति को विधिवत स्थापित और पूजा जाता है, वहाँ रह सकता है।"
भगवान यहाँ पवित्रता और पाप के विषय पर विस्तार करते हैं, जो पवित्रता और अशुद्धता पर आधारित हैं। इस प्रकार निवास के शुद्ध और दूषित स्थानों का यहाँ वर्णन किया गया है।
