गायत्र्युष्णिगनुष्टुप् च बृहती पङ्क्तिरेव च ।
त्रिष्टुब्जगत्यतिच्छन्दो ह्यत्यष्ट्यतिजगद् विराट् ॥ ४१ ॥
अनुवाद
वैदिक छन्द हैं—गायत्री, उष्णिक्, अनुष्टुप्, बृहती, पंक्ति, त्रिष्टुप्, जगती, अतिच्छन्द, अत्यष्टि, अतिजगती तथा अतिविराट।
Vedic verses are – Gayatri, Ushnik, Anushtup, Brihati, Pankti, Trishtup, Jagati, Atichchhand, Atyashti, Atijagati and Ativiraat.
तात्पर्य
गायत्री छन्द में चौबीस अक्षर, उष्णिक में अट्ठाइस, अनुष्टूप में बत्तीस इत्यादि, प्रत्येक छन्द में उसके पूर्ववर्ती छन्द से चार अक्षर अधिक होते हैं। वैदिक ध्वनि वृहती कहलाती है, जो अत्यधिक विशाल होती है, इसलिए सामान्य जीवों के लिए ध्वनियों को लेकर ऐसी तकनीकी बातों को समझना सम्भव नहीं है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥