वेदों का परा ध्वनि को समझ पाना अत्यंत कठिन है और वह प्राण, इंद्रियों और मन के अंदर विभिन्न स्तरों पर अभिव्यक्त होता है। यह वैदिक ध्वनि समुद्र के समान अपार, अगाध और अथाह है।
The divine sound of the Vedas is extremely difficult to understand and it manifests at various levels within the Prana, senses and mind. This Vedic sound is boundless, unfathomable and bottomless like the ocean.
तात्पर्य
वैदिक ज्ञान के अनुसार, वैदिक ध्वनि को चार चरणों में विभाजित किया जाता है, जिसे केवल सबसे बुद्धिमान ब्राह्मण ही समझ सकते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि तीन विभाजन प्राणी के अंदर स्थित है और केवल चौथा विभाजन बाहरी रूप से प्रकट होता है, वाणी के रूप में। यहां तक कि वैदिक ध्वनि का यह चौथा चरण, जिसे वैखरी कहा जाता है, साधारण मनुष्यों के लिए समझना बहुत कठिन है। श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर इन विभाजनों को इस प्रकार समझाते हैं। वैदिक ध्वनि के प्राण चरण, जिसे परा के रूप में जाना जाता है, आधार-चक्र में स्थित है; मानसिक चरण, जिसे पश्यंती के रूप में जाना जाता है, नाभि के क्षेत्र में, मणिपुरक-चक्र पर स्थित है; बौद्धिक चरण, जिसे मध्यमा के रूप में जाना जाता है, हृदय क्षेत्र में, अनाहत-चक्र में स्थित है। अंत में, वैदिक ध्वनि के प्रकट संवेदी चरण को वैखरी कहा जाता है। ऐसी वैदिक ध्वनि अनंत-पार है क्योंकि यह ब्रह्मांड के भीतर और उससे परे सभी महत्वपूर्ण ऊर्जाओं को समाहित करती है और इस तरह समय या स्थान से अविभाजित है। वास्तव में, वैदिक ध्वनि कंपन इतना सूक्ष्म, अथाह और गहरा है कि केवल स्वयं भगवान और उनके सशक्त अनुयायी जैसे व्यास और नारद ही इसके वास्तविक रूप और अर्थ को समझ सकते हैं। साधारण मनुष्य वैदिक ध्वनि की सभी पेचीदगियों और सूक्ष्मताओं को नहीं समझ सकते, लेकिन अगर कोई कृष्ण चेतना में उतरता है, तो वह तुरंत वैदिक ज्ञान के सभी निष्कर्षों को समझ सकता है, अर्थात् स्वयं भगवान कृष्ण, वैदिक ज्ञान का मूल स्रोत। मूर्ख व्यक्ति अपनी महत्वपूर्ण हवा, इंद्रियों और मन को इंद्रिय तृप्ति के लिए समर्पित करते हैं और इस प्रकार भगवान के पवित्र नाम के पारलौकिक मूल्य को नहीं समझते हैं। अंततः, सभी वैदिक ध्वनियों का सार सर्वोच्च भगवान का पवित्र नाम है, जो स्वयं भगवान से अलग नहीं है। चूँकि भगवान असीमित हैं, उनका पवित्र नाम भी उतना ही असीमित है। भगवान की प्रत्यक्ष कृपा के बिना कोई भी भगवान की पारलौकिक महिमा को नहीं समझ सकता है। अपराध रहित रूप से पवित्र नामों का जाप करके हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे/ हरे राम, हरे राम, राम राम, हरे हरे, व्यक्ति वैदिक ध्वनि के पारलौकिक रहस्यों में प्रवेश कर सकता है। नहीं तो वेदों का ज्ञान दुर्विगाह्यम रहेगा, या प्रवेश करना असंभव होगा।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥