ते मे मतमविज्ञाय परोक्षं विषयात्मका: ।
हिंसायां यदि राग: स्याद् यज्ञ एव न चोदना ॥ २९ ॥
हिंसाविहारा ह्यालब्धै: पशुभि: स्वसुखेच्छया ।
यजन्ते देवता यज्ञै: पितृभूतपतीन् खला: ॥ ३० ॥
अनुवाद
जो लोग इन्द्रियतृप्ति के पीछे भागते हैं, वे मेरे द्वारा समझाए गए वैदिक ज्ञान के गुप्त निष्कर्ष को समझ नहीं सकते। वे हिंसा में आनंद लेते हैं और अपनी इन्द्रियतृप्ति के लिए निर्दोष जानवरों को बलिदान करके मारते हैं और इस प्रकार वे देवताओं, पूर्वजों और भूत-प्रेतों के नेताओं की पूजा करते हैं। हालाँकि, वैदिक यज्ञ प्रक्रिया में हिंसा की ऐसी तीव्र इच्छा को कभी भी प्रोत्साहित नहीं किया जाता है।
Those who are under the influence of sense gratification cannot understand the deep meaning of the Vedic knowledge told by me. They enjoy violence and ruthlessly kill innocent animals in sacrifices for their own sense gratification and thus worship the heroes of the gods, ancestors and ghosts and spirits. But such an intense desire for violence is never encouraged in the Vedic sacrificial ritual.
तात्पर्य
वैदिक शास्त्र कुछ ऐसे पशु बलिदान देकर उन क्रूर, निम्न श्रेणी के व्यक्तियों को संतुष्ट करने की अनुमति देते हैं जो मांस और खून के स्वाद के बिना नहीं रह सकते हैं। हालाँकि, इस तरह की रियायतें कठोर लेकिन अनिवार्य अनुष्ठानों से नियंत्रित होती हैं और धीरे-धीरे पशु-बध को हतोत्साहित करने के लिए होती हैं, ठीक उसी तरह जिस तरह शराब के लाइसेन्स की अत्यधिक लागत शराब बेचने वाले आउटलेट्स की संख्या को सीमित करती है। लेकिन कपटी लोग इस तरह के प्रतिबंधात्मक प्रतिबंधों की गलत व्याख्या करते हैं और ऐसे घोषित करते हैं कि वैदिक यज्ञ इंद्रिय-संतुष्टि के लिए पशुओं का वध करने के लिए हैं। वे भौतिकवादी होते हुए, पितरों या देवताओं के ग्रहों को प्राप्त करने की इच्छा रखते हैं और इस प्रकार ऐसे प्राणियों की पूजा करते हैं। कभी-कभी भौतिकवादी व्यक्ति भूतों के सूक्ष्म जीवन शैली की ओर आकर्षित होते हैं और भूतिया प्राणियों की पूजा करते हैं। ये विधियाँ परम भगवान के बारे में अत्यधिक अज्ञानता को दर्शाती हैं, जो वास्तव में सभी बलिदानों और तपों का उपभोक्ता हैं। राक्षस वैदिक यज्ञ करते हैं, किन्तु वे भगवान नारायण के विरोधी होते हैं, क्योंकि वे देवताओं, पितरों या भगवान शिव को ईश्वर के बराबर मानते हैं। यद्यपि वैदिक अनुष्ठानों के अधिकार को समझते हुए, वे अंतिम वैदिक निष्कर्ष को स्वीकार नहीं करते हैं और इसलिए कभी भी भगवान के सामने आत्मसमर्पण नहीं करते हैं। इस प्रकार झूठे धार्मिक सिद्धांत पशु-हत्यारों के राक्षसी समाजों में पनपते हैं। हालाँकि अमेरिका जैसे देशों में लोग बाहरी रूप से केवल भगवान के अनुयायी होने का दावा करते हैं, लेकिन वास्तविक पूजा और महिमा अनगिनत लोकप्रिय नायकों को दी जाती है, जैसे कि मनोरंजन करने वाले, राजनेता, एथलीट और अन्य समान रूप से महत्वहीन व्यक्ति। पशु-हत्यारे भौतिक तौर पर निरर्थक होने के कारण भौतिक माया की अतिरिक्त विशेषताओं से अनिवार्य रूप से आकर्षित होते हैं, वे कृष्ण चेतना या आध्यात्मिक जीवन के वास्तविक मंच को समझ नहीं सकते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥