चूंकि आधुनिक समाज पुरुषों और महिलाओं के अप्रतिबंधित मिश्रण को स्वीकार करता है, इसके नागरिक संभवतः शांति प्राप्त नहीं कर सकते; बल्कि संघर्ष का विनियमन सामाजिक अस्तित्व का आधार बन जाता है। यह एक अज्ञानी समाज का लक्षण है जो यहाँ viषयेषु गुणाध्यासात शब्दों से वर्णित है, जो भौतिक शरीर को सर्वोच्च वस्तु के रूप में झूठा स्वीकार करता है। जो व्यक्ति अपने शरीर से बहुत अधिक स्नेह करता है वह अनिवार्य रूप से कामवासना से ग्रस्त हो जाएगा।
