श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 21: भगवान् कृष्ण द्वारा वैदिक पथ की व्याख्या  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  11.21.19 
विषयेषु गुणाध्यासात् पुंस: सङ्गस्ततो भवेत् ।
सङ्गात्तत्र भवेत् काम: कामादेव कलिर्नृणाम् ॥ १९ ॥
 
 
अनुवाद
जो व्यक्ति भौतिक इन्द्रिय-विषयों की इच्छा करता है, वह निश्चित रूप से उनके प्रति आसक्त हो जाता है। ऐसी आसक्ति से काम उत्पन्न होता है और यही काम लोगों में कलह पैदा करता है।
 
A person who considers material sense-objects as his desires, definitely gets attached to them. Such attachment gives rise to lust and this lust causes conflicts among people.
तात्पर्य
मानव जीवन का वास्तविक लक्ष्य भौतिक इंद्रियतृप्ति नहीं होना चाहिए, क्योंकि यह मानव समाज में संघर्ष का आधार है। यद्यपि वैदिक साहित्य कभी-कभी इंद्रियतृप्ति को स्वीकार करता है, परंतु वेदों का परम प्रयोजन त्याग होता है, क्योंकि वैदिक संस्कृति ऐसी कोई चीज़ निश्चित रूप से नहीं सुझा सकती जो मानव जीवन को परेशान करती है। एक कामुक व्यक्ति आसानी से क्रोधित हो जाता है और अपनी कामुक इच्छाओं को विफल करने वाले किसी भी व्यक्ति से दुश्मनी करने लगता है। चूंकि उसकी कामवासना कभी भी संतुष्ट नहीं हो सकती, एक कामुक व्यक्ति अंततः अपने स्वयं के यौन साथी से निराश हो जाता है, और इस तरह एक “प्रेम-घृणा” संबंध विकसित होता है। एक कामुक व्यक्ति खुद को ईश्वर की रचना का भोगी मानता है और इसलिए वह गर्व और झूठी प्रतिष्ठा से भरा होता है। कामुक, घमंडी व्यक्ति वास्तविक आध्यात्मिक गुरु के चरण कमलों में विनम्र समर्पण की प्रक्रिया की ओर आकर्षित नहीं होगा। इस प्रकार, अवैध यौन संबंध के प्रति आकर्षण कृष्ण चेतना का प्रत्यक्ष शत्रु है जो सर्वोच्च प्रभु के प्रतिनिधि के प्रति विनम्र समर्पण पर निर्भर करता है। भगवान कृष्ण ने भी भगवद् गीता में कहा है कि अवैध यौन संबंध की इच्छा इस संसार की सर्वनाशक पापपूर्ण दुश्मन है।

चूंकि आधुनिक समाज पुरुषों और महिलाओं के अप्रतिबंधित मिश्रण को स्वीकार करता है, इसके नागरिक संभवतः शांति प्राप्त नहीं कर सकते; बल्कि संघर्ष का विनियमन सामाजिक अस्तित्व का आधार बन जाता है। यह एक अज्ञानी समाज का लक्षण है जो यहाँ viषयेषु गुणाध्यासात शब्दों से वर्णित है, जो भौतिक शरीर को सर्वोच्च वस्तु के रूप में झूठा स्वीकार करता है। जो व्यक्ति अपने शरीर से बहुत अधिक स्नेह करता है वह अनिवार्य रूप से कामवासना से ग्रस्त हो जाएगा।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)