श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 20: शुद्ध भक्ति ज्ञान एवं वैराग्य से आगे निकल जाती है  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  11.20.37 
एवमेतान् मया दिष्टाननुतिष्ठन्ति मे पथ: ।
क्षेमं विन्दन्ति मत्स्थानं यद् ब्रह्म परमं विदु: ॥ ३७ ॥
 
 
अनुवाद
जो लोग मेरे द्वारा बताए गए मार्गों से मेरा साक्षात्कार करने का गंभीरता से अनुसरण करते हैं, वे मोह-माया से छुटकारा पा लेते हैं और मेरे सर्वोच्च लोक में पहुँचकर तत्वज्ञान को अच्छी तरह से समझ लेते हैं।
 
Those who seriously follow these rules taught by Me for attaining Me, they get rid of attachment and, on reaching My abode, they understand the Supreme Brahman well.
 
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध ग्यारह के अंतर्गत बीसवाँ अध्याय समाप्त होता है ।
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)