Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 11.2.23: नौ योगेंद्र मुक्त आत्माएं हैं जो देवताओं, सिद्धों, साध्यों, गंधर्वों, यक्षों, मनुष्यों और किन्नरों और नागों के लोकों में स्वतंत्र रूप से विचरण करते हैं। किसी भी सांसारिक शक्ति द्वारा उनके आवागमन को रोक नहीं सकता और वे इच्छा करने पर मुनियों, देवदूतों, भगवान शिव के भूत-प्रेत अनुयायियों, विद्याधरों, ब्राह्मणों और गायों के लोकों में भी विचरण कर सकते हैं। | bhagavat अध्याय 11.2: नौ योगेन्द्रों से महाराज निमि की भेंट । bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नौ योगेंद्र मुक्त आत्माएं हैं जो देवताओं, सिद्धों, साध्यों, गंधर्वों, यक्षों, मनुष्यों और किन्नरों और नागों के लोकों में स्वतंत्र रूप से विचरण करते हैं। किसी भी सांसारिक शक्ति द्वारा उनके आवागमन को रोक नहीं सकता और वे इच्छा करने पर मुनियों, देवदूतों, भगवान शिव के भूत-प्रेत अनुयायियों, विद्याधरों, ब्राह्मणों और गायों के लोकों में भी विचरण कर सकते हैं।
The nine Yogendras are liberated souls who roam freely in the worlds of gods, Siddhas, Sadhyas, Gandharvas, Yakshas, humans, Kinnars and snakes. No worldly power can stop their free movement and they can roam in the worlds of sages, angels, ghost-spirit followers of Lord Shiva, Vidyadhars, Brahmins and cows as per their wish.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥