Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 11.2.16: श्री ऋषभदेव को भगवान वासुदेव के अंश के रूप में माना जाता है। इस दुनिया में उन्होंने उन धार्मिक सिद्धांतों का प्रसार करने के लिए अवतार लिया था जिससे जीवों को पूर्ण मुक्ति प्राप्त हो सकती है। उनके एक सौ पुत्र थे जो सभी वैदिक ज्ञान के विशेषज्ञ थे। | bhagavat अध्याय 11.2: नौ योगेन्द्रों से महाराज निमि की भेंट । bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तमाहुर्वासुदेवांशं मोक्षधर्मविवक्षया ।
अवतीर्णं सुतशतं तस्यासीद् ब्रह्मपारगम् ॥ १६ ॥
अनुवाद
श्री ऋषभदेव को भगवान वासुदेव के अंश के रूप में माना जाता है। इस दुनिया में उन्होंने उन धार्मिक सिद्धांतों का प्रसार करने के लिए अवतार लिया था जिससे जीवों को पूर्ण मुक्ति प्राप्त हो सकती है। उनके एक सौ पुत्र थे जो सभी वैदिक ज्ञान के विशेषज्ञ थे।
Shri Rishabhdev is considered to be a part of Lord Vasudev. He took incarnation in this world to spread those religious principles which provide ultimate salvation to the living beings. He had one hundred sons, all of whom were well versed in Vedic knowledge.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥