प्रियव्रतो नाम सुतो मनो: स्वायम्भुवस्य य: ।
तस्याग्नीध्रस्ततो नाभिऋर्षभस्तत्सुत: स्मृत: ॥ १५ ॥
अनुवाद
स्वायम्भुव मनु के पुत्र थे महाराज प्रियव्रत, और प्रियव्रत के पुत्रों में से एक थे आग्नीध्र। आग्नीध्र के पुत्र हुए नाभि, जिनके पुत्र का नाम था ऋषभदेव।
Swayambhuva Manu had a son named Maharaj Priyavrat and among the sons of Priyavrat was Agnidhra from whom Nabhi was born. Nabhi's son was called Rishabhdev.
तात्पर्य
इस श्लोक में ऋषभदेव के पुत्रों की वंशावली पृष्ठभूमि दी गई है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥