हे प्रभु, जो व्यक्ति जन्म और मृत्यु के कष्टदायी मार्ग पर चल रहा है और हमेशा तीनों प्रकार के दुखों से घिरा हुआ है, उसे आपके चरणकमलों के अलावा कोई दूसरा आश्रय नहीं है। आपके चरणकमल एक ऐसे सुखदायक छाते के समान हैं जो स्वादिष्ट अमृत की वर्षा करता है।
O Lord, for one who is tormented in the grim path of birth and death and is constantly overwhelmed by the three troubles, I see no possible shelter except Your two lotus feet. These are like a soothing umbrella that showers delicious nectar.
तात्पर्य
भगवान कृष्ण, उद्धव के उच्च बौद्धिक स्वभाव को पहचानते हुए, बार-बार उसे सलाह देते आए हैं कि व्यक्ति को आध्यात्मिक ज्ञान की साधना के द्वारा अपनी विशिष्टता प्राप्त करनी चाहिए। परन्तु भगवान ने स्पष्ट तौर से यह भी दर्शाया है कि ऐसे ज्ञान से व्यक्ति को उनकी भक्ति में आने पर प्रेममय निष्ठा की प्राप्ति करनी चाहिए, नहीं तो वह ज्ञान निरर्थक है। इस श्लोक में श्री उद्धव भगवान कृष्ण के वक्तव्य को सही मानता है कि वास्तविक खुशी उनके चरण कमलों के प्रति आत्मसमर्पण करने से ही प्राप्त होती है। जब ईश्वर के अवतार पृथु महाराज का राज्याभिषेक हुआ, तब देवता वायु ने उन्हें एक ऐसा छाता भेंट किया था जिससे लगातार महीन पानी के कणों का छिड़काव होता रहता था। इसी प्रकार भगवान के दोनों चरण कमलों की तुलना यहाँ एक ऐसे अद्भुत छाते से की गई है जो लगातार अमृत की वर्षा करता है, कृष्ण चेतना का आनंद देता है। सामान्य तौर पर, अटकलबाजों के विश्लेषणात्मक ज्ञान का अंत परम सत्य की एक अवैयक्तिक अवधारणा के साथ हो जाता है, पर श्री उद्धव ने यहाँ कहा है कि अवैयक्तिक आध्यात्मिक अस्तित्व में विलीन होकर हासिल की जाने वाली तथाकथित खुशी, कृष्ण चेतना की खुशी के समकक्ष कभी नहीं हो सकती। इस प्रकार कृष्ण चेतना स्वचालित रूप से परिपूर्ण ज्ञान का गठन करती है, क्योंकि भगवान कृष्ण सभी जीवित प्राणियों का परम आश्रय हैं। इस श्लोक में अभिहतस्या और अभिवर्षात शब्द महत्वपूर्ण हैं। अभिहतस्या का अर्थ है वह जो भौतिक प्रकृति के आक्रमण से सभी तरफ से पराजित हो रहा हो, जबकि अभिवर्षात का अर्थ है अमृत की वर्षा, जो भौतिक अस्तित्व की सभी समस्याओं को खत्म कर देती है। हमारी बुद्धिमत्ता द्वारा हमें आलसी भौतिक शरीर और निरर्थक भौतिक मन से परे देखना चाहिए जिससे भगवान कृष्ण के दोनों चरण कमलों से आने वाले अमृत के असीमित छिड़काव को अवलोकन किया जा सके। इसके बाद हमारा असली सौभाग्य शुरू होगा।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥