श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 19: आध्यात्मिक ज्ञान की सिद्धि  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  11.19.5 
तस्माज्ज्ञानेन सहितं ज्ञात्वा स्वात्मानमुद्धव ।
ज्ञानविज्ञानसम्पन्नो भज मां भक्तिभावत: ॥ ५ ॥
 
 
अनुवाद
इसलिए हे उद्धव, ज्ञान के मार्ग से अपने वास्तविक आत्म को समझो। तत्पश्चात् अपने वैदिक ज्ञान की स्पष्ट अनुभूति से आगे बढ़ते हुए, प्रेम और भक्ति की भावना से मेरी पूजा करो।
 
Therefore, O Uddhava, know your true Self through knowledge. Then, proceeding from the clear realization of your Vedic knowledge, worship Me with loving devotion.
तात्पर्य
विज्ञान शब्द अपने मौलिक, आध्यात्मिक रूप के साक्षात्कृत ज्ञान का संकेत देता है। प्रत्येक जीवधारक का एक शाश्वत आध्यात्मिक रूप होता है, जो तब तक निष्क्रिय रहता है जब तक कि वह अपनी मौलिक कृष्ण भावना को नहीं जगाता। अपने स्वयं के आध्यात्मिक व्यक्तित्व के ज्ञान के बिना सर्वोच्च व्यक्तित्व, भगवान कृष्ण के प्रति प्रेम का संवर्धन करना संभव नहीं है। इसलिए, यहां शब्द ज्ञात्रा स्वात्मानम महत्वपूर्ण हैं, जो यह संकेत देते हैं कि प्रत्येक जीवधारक अपनी पूर्ण क्षमता को एक व्यक्तिगत व्यक्ति के रूप में केवल ईश्वर के राज्य में ही प्राप्त कर सकता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)