मूझमें बुद्धि को स्थापित करना मानसिक संतुलन है, और इन्द्रियों पर पूर्ण नियंत्रण रखना आत्म-नियंत्रण है। सहिष्णुता का अर्थ है धैर्यपूर्वक दुखों को सहना, और स्थिरता तब आती है जब कोई व्यक्ति अपनी जीभ और जननांगों पर विजय प्राप्त कर लेता है। सबसे बड़ा दान है दूसरों के प्रति किसी भी प्रकार के आक्रमण को त्याग देना, और वासना का त्याग ही वास्तविक तपस्या है। वास्तविक वीरता है भौतिक जीवन का भोग करने की स्वाभाविक प्रवृत्ति पर विजय प्राप्त करना, और भगवान को सर्वत्र देखना ही वास्तविकता है। सच्चाई का अर्थ है महान ऋषियों द्वारा घोषित किए गए अनुसार सुखद ढंग से सत्य बोलना। स्वच्छता का अर्थ है स्वार्थी कार्यों से वैराग्य, जबकि त्याग ही संन्यास है। मनुष्यों के लिए वास्तविक वांछनीय धन धार्मिकता है, और मैं, भगवान ही यज्ञ हूं। आध्यात्मिक निर्देश प्राप्त करने के उद्देश्य से गुरु के प्रति भक्ति ही दक्षिणा है, और सबसे बड़ी शक्ति प्राणायाम श्वास नियंत्रण प्रणाली है।
Focusing the mind on Me is mental balance (Shama) and complete control of the senses is self-control (Dama). Tolerance means to endure suffering with patience. Stability comes when a man conquers the tongue and the genitals. The greatest charity is to renounce all kinds of molestation towards others. Renunciation of Kama (sensuality) is the real penance. Real bravery is to conquer the natural tendency to enjoy material life and to see God everywhere is truth (Satya). Truthfulness means speaking the truth sweetly as declared by the great sages. Cleanliness means detachment from fruitive actions while renunciation is Sannyasa. The real desired wealth of men is righteousness and I, the Lord, am the sacrifice. For the purpose of receiving spiritual teachings, Guru-Bhakti is the Dakshina and the greatest power is the Pranayama method of breath-holding.
तात्पर्य
भगवान कृष्ण यहाँ मानवीय जीवन की उन्नति के लिए काम आने वाले उन गुणों का वर्णन करते हैं। शम, या 'मानसिक संतुलन' का अर्थ है अपनी बुद्धि को श्रीकृष्ण पर स्थिर करना। कृष्ण भक्ति के बिना शांतिपूर्ण रहना दिमाग के लिए एक नीरस और अनुपयोगी स्थिति है। दम, या 'अनुशासन' का अर्थ है पहले अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण करना। अगर कोई अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण किए बिना अपने बच्चों, शिष्यों या अनुयायियों को अनुशासित करना चाहता है, तो वह केवल एक मजाक बन जाता है। सहिष्णुता का अर्थ है कि दुखों को धैर्यपूर्वक सहना, जैसे कि दूसरों के अपमान या लापरवाही से होने वाले दुख। ग्रंथों में दिए गए आदेशों का पालन करने के लिए कभी-कभी हमें भौतिक असुविधाओं को भी सहना पड़ता है, और उस दुख को भी धैर्यपूर्वक सहना पड़ता है। अगर कोई, दूसरे के अपमान और दुर्व्यवहार को बर्दाश्त नहीं कर पाता, या फिर प्रामाणिक धर्म ग्रंथों का पालन करने की वजह से होने वाली असुविधाओं को बर्दाश्त नहीं कर पाता, तो केवल दूसरों को प्रभावित करने के लिए अत्यधिक गर्मी, सर्दी और दर्द आदि को बर्दाश्त करने का ढोंग करना उसके लिए मूर्खता ही है। दृढ़ता से जुड़े हुए अगर कोई अपनी जीभ और जननांगों को नियंत्रित नहीं करता, तो उसकी अन्य दृढ़ता बेकार है। वास्तविक दान का अर्थ है दूसरों के प्रति आक्रामकता को त्यागना। अगर कोई दान के कार्यों के लिए पैसे देता है लेकिन उसी समय शोषणकारी व्यापारिक उपक्रमों या दुर्व्यवहारपूर्ण राजनीतिक रणनीति में संलग्न रहता है, तो उसका दान किसी भी काम का नहीं है। तपस्या का अर्थ है वासना और इंद्रिय तुष्टि का त्याग करना और एकादशी जैसे निर्धारित व्रतों का पालन करना; इस का मतलब भौतिक शरीर को यातना देने के मनमाने तरीके नहीं हैं। वास्तविक वीरता अपने निचले स्वभाव को जीतना है। निश्चित रूप से हर कोई अपने आप को एक शानदार व्यक्ति के रूप में प्रचारित करना पसंद करता है, लेकिन हर कोई वासना, क्रोध, लालच आदि के अधीन भी है। इसलिए, अगर कोई वासना और अज्ञानता के तरीके से उत्पन्न इन निम्न विशेषताओं को जीत सकता है, तो वह उन लोगों से ज्यादा बड़ा हीरो है जो केवल साज़िश और हिंसा के माध्यम से अपने राजनीतिक विरोधियों को खत्म करते हैं। कोई भी ईर्ष्या और द्वेष को त्याग कर और हर भौतिक शरीर के भीतर आत्मा के अस्तित्व को पहचान कर समान दृष्टिकोण विकसित कर सकता है। यह दृष्टिकोण परम प्रभु को प्रसन्न करता है, जो तब स्वयं को प्रकट करते हैं, हमेशा के लिए उनकी समान दृष्टि को मजबूत करते हुए। केवल उन चीज़ों का वर्णन करना जो मौजूद हैं, वास्तविकता की धारणा में अंतिम शब्द नहीं है। सभी जीवित संस्थाओं और सभी स्थितियों की वास्तविक आध्यात्मिक समानता भी देखनी चाहिए। सच्चाई का मतलब है कि किसी को भी एक सुखदायक तरीके से बात करनी चाहिए ताकि इसका लाभदायक प्रभाव पड़े। अगर कोई दूसरे लोगों की खामियों को इंगित करने के लिए सच्चाई के नाम पर जुड़ जाता है, तो ऐसे गलती खोजने को संत व्यक्ति सराहेंगे नहीं। एक वास्तविक आध्यात्मिक गुरु सच इस तरह से बोलता है जिससे लोग खुद को आध्यात्मिक धरातल पर उठा सकते हैं, और इस सच्चाई की कला को सीखना चाहिए। अगर कोई भौतिक चीज़ों से लगा हुआ है, तो उसके शरीर और दिमाग को हमेशा प्रदूषित माना जाएगा। इसलिए पाक-साफ का मतलब है भौतिक मोह का त्याग करना, न कि केवल बार-बार अपनी त्वचा को पानी से धोना। वास्तविक त्याग का अर्थ है अपने रिश्तेदारों और पत्नी पर अपने स्वामित्व के झूठे भाव को छोड़ना, न कि केवल भौतिक वस्तुओं को छोड़ना, जबकि असली धन धार्मिक होना है। बलिदान स्वयं भगवान का व्यक्तित्व है, क्योंकि बलिदान करने वाले को सफल होने के लिए अपनी चेतना को भगवान के व्यक्तित्व में अवशोषित करना चाहिए, न कि अस्थायी, भौतिक पुरस्कारों में जो बलिदान से प्राप्त हो सकते हैं। वास्तविक धार्मिक पारिश्रमिक का मतलब यह है कि किसी को उन संत व्यक्तियों की सेवा करनी चाहिए जो उसे आध्यात्मिक ज्ञान से प्रबुद्ध कर सकते हैं। कोई अपने आध्यात्मिक गुरु को, जिसने उसे प्रबुद्ध किया है, उसी ज्ञान को दूसरों को वितरित करके पारिश्रमिक दे सकता है, जिससे आचार्य प्रसन्न होंगे। इस प्रकार प्रचार कार्य पारिश्रमिक का सर्वोच्च रूप है। प्राणायाम श्वसन नियंत्रण प्रणाली का पालन करके, कोई भी आसानी से दिमाग को वश में कर सकता है, और जो इस तरह से बेचैन दिमाग पर पूरी तरह से नियंत्रण कर सकता है, वह सबसे शक्तिशाली व्यक्ति है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥