श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 19: आध्यात्मिक ज्ञान की सिद्धि  »  श्लोक 28-32
 
 
श्लोक  11.19.28-32 
श्रीउद्धव उवाच
यम: कतिविध: प्रोक्तो नियमो वारिकर्षण ।
क: शम: को दम: कृष्ण का तितिक्षा धृति: प्रभो ॥ २८ ॥
किं दानं किं तप: शौर्यं किम् सत्यमृतमुच्यते ।
कस्त्याग: किं धनं चेष्टं को यज्ञ: का च दक्षिणा ॥ २९ ॥
पुंस: किं स्विद् बलं श्रीमन् भगो लाभश्च केशव ।
का विद्या ह्री: परा का श्री: किं सुखं दु:खमेव च ॥ ३० ॥
क: पण्डित: कश्च मूर्ख: क: पन्था उत्पथश्च क: ।
क: स्वर्गो नरक: क: स्वित् को बन्धुरुत किं गृहम् ॥ ३१ ॥
क आढ्य: को दरिद्रो वा कृपण: क: क ईश्वर: ।
एतान् प्रश्न‍ान् मम ब्रूहि विपरीतांश्च सत्पते ॥ ३२ ॥
 
 
अनुवाद
श्री उद्धव ने कहा: हे कृष्ण, हे शत्रुओं को दंड देने वाले, कृपा करके मुझसे यह बताएं कि कितने प्रकार के अनुशासनात्मक नियम (यम) और नियमित दैनिक कार्य (नियम) हैं। इसके अलावा, हे प्रभु, मुझे यह भी बताएं कि मानसिक संतुलन क्या है, आत्मसंयम क्या है और सहिष्णुता और दृढ़ता का वास्तविक अर्थ क्या है? दान, तपस्या और शौर्य क्या हैं और वास्तविकता और सच्चाई का वर्णन कैसे किया जाता है? त्याग क्या है और संपत्ति क्या है? वांछित क्या है, यज्ञ क्या है और धार्मिक पारिश्रमिक क्या है? हे केशव, हे भाग्यशाली, मैं किसी व्यक्ति की शक्ति, संपत्ति और लाभ को कैसे समझूं? सर्वोत्तम शिक्षा क्या है? वास्तविक विनम्रता क्या है और वास्तविक सुंदरता क्या है? सुख और दुख क्या हैं? कौन विद्वान है और कौन मूर्ख है? जीवन में सच्चे और झूठे रास्ते क्या हैं और स्वर्ग और नर्क क्या हैं? वास्तव में एक सच्चा मित्र कौन है और एक का असली घर क्या है? कौन धनी है और कौन निर्धन है? कौन दयनीय है और कौन वास्तविक नियंत्रक है? हे भक्तों के स्वामी, कृपया मुझे इन बातों के साथ-साथ इनके विपरीत बातें भी बताएं।
 
Sri Uddhava said: O Krishna, O punisher of enemies, kindly tell me how many kinds of disciplinary rules (yamas) and regular daily activities (niyama) there are. Not only this, O Lord, tell me also what is mental balance, what is self-control and what is the real meaning of tolerance and firmness? What are charity, austerity and bravery and how are reality and truth described? What is renunciation and what is wealth? What is desired, what is sacrifice and what is dakshina? O Kesava, O fortunate one, how do I understand the strength, prosperity and benefit of a person? What is the best education? What is real humility and what is real beauty? What are happiness and sorrow? Who is learned and who is foolish? What are the real and false paths of life and what are heaven and hell? Who is the real friend and what is the real home? Who is rich and who is poor? Who is miser and who is the real controller? O Lord of the devotees, kindly tell me these things along with their opposite things also.
तात्पर्य
इन पाँच श्लोकों में वर्णित सभी पदों की परिभाषाएँ विश्व की भिन्न-भिन्न संस्कृतियों और समाजों में भिन्न-भिन्न प्रकार से की जाती हैं। इसीलिए, श्री उद्धव सभ्य जीवन के इन सार्वभौमिक पहलुओं की मानक परिभाषा प्राप्त करने के लिए सीधे परम अधिकारी भगवान कृष्ण के पास जा रहे हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)