Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 11.19.13: अब मैं तुमसे वैदिक ज्ञान, विरक्ति, आत्म-अनुभूति, श्रद्धा और भक्ति के उन धार्मिक सिद्धांतों का वर्णन करूँगा जिन्हें भीष्मदेव ने स्वयं अपने मुख से सुना था। | bhagavat अध्याय 11.19: आध्यात्मिक ज्ञान की सिद्धि । bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तानहं तेऽभिधास्यामि देवव्रतमुखाच्छ्रुतान् ।
ज्ञानवैराग्यविज्ञानश्रद्धाभक्त्युपबृंहितान् ॥ १३ ॥
अनुवाद
अब मैं तुमसे वैदिक ज्ञान, विरक्ति, आत्म-अनुभूति, श्रद्धा और भक्ति के उन धार्मिक सिद्धांतों का वर्णन करूँगा जिन्हें भीष्मदेव ने स्वयं अपने मुख से सुना था।
Now I will describe to you the religious principles of Vedic knowledge, detachment, self-realization, faith and devotion that I heard from the mouth of Bhishmadeva.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥