वन्यैश्चरुपुरोडाशैर्निर्वपेत् कालचोदितान् ।
न तु श्रौतेन पशुना मां यजेत वनाश्रमी ॥ ७ ॥
अनुवाद
जिसने वानप्रस्थ आश्रम स्वीकार कर लिया है, उसे चाहिए कि जंगली चावल और अन्य अनाज से बने चरु और यज्ञ-रोटी (पुरोडाश) की आहुति से ऋतु के अनुसार यज्ञ करे। किंतु वानप्रस्थ को कभी भी मुझे पशु-बलि नहीं चढ़ानी चाहिए, यहाँ तक कि वेदों में बताए गए पशु-बलि भी नहीं।
One who has adopted the Vanaprastha Ashrama should perform the yagna according to the season with the oblations of Charu and the sacrificial bread (Purodasha) prepared from rice and other grains found in the forest. But a Vanaprastha should never offer me animal sacrifices, even those mentioned in the Vedas.
तात्पर्य
वानप्रस्थ आश्रम ग्रहण करने वाले को पशु बलि या मांस भक्षण नहीं करना चाहिए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥