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श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 17: भगवान् कृष्ण द्वारा वर्णाश्रम प्रणाली का वर्णन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  11.17.7 
तत्त्वं न: सर्वधर्मज्ञ धर्मस्त्वद्भ‍‍क्तिलक्षण: ।
यथा यस्य विधीयेत तथा वर्णय मे प्रभो ॥ ७ ॥
 
 
अनुवाद
इसलिए, हे प्रभु, चूँकि आप सभी धार्मिक सिद्धांतों के ज्ञाता हैं, इसलिए कृपया उन मनुष्यों का वर्णन करें जो आपकी प्रेममयी सेवा का पालन कर सकते हैं और ऐसी सेवा कैसे की जानी चाहिए।
 
Therefore, O Lord, being the knower of all the religious rules, please describe to me those persons who can accomplish the path of devotion to You, and also tell me how such devotion is performed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)