अपने पारिवारिक कर्तव्यों का पालन करते हुए मेरी पूजा करने वाला गृहस्थ भक्त चाहे तो घर में ही रह सकता है या किसी पवित्र स्थान पर जा सकता है या उसके कोई जिम्मेदार पुत्र हो, तो वह संन्यास ग्रहण कर सकता है।
A householder devotee who worships Me while performing his family duties can either stay at home or go to some holy place, or, if he has a responsible son, he can take up Sannyasa.
तात्पर्य
में यह श्लोक गृहस्थ के लिए तीन विकल्प बताता है। पहला, वो घर में रहना जारी रख सकता है। दूसरा, वो वानप्रस्थ ले सकता है, जिसमें अपनी पत्नी के साथ किसी पवित्र जगह पर जाना शामिल होता है। तीसरा, वानप्रस्थ लेने का योग्य विकल्प है, अगर उसके पास एक जिम्मेदार बेटा है जो उसके पारिवारिक दायित्वों को सम्भाल सकता हो, ताकि वो संन्यास ले सके और जीवन की समस्याओं के लिए एक निश्चित उपाय के रूप में संन्यासी का रूप ले सके। तीनों आश्रमों में, सबसे बड़ी सफलता परम प्रभु के प्रति ईमानदारी से समर्पण करने पर निर्भर करती है, तो सबसे महत्वपूर्ण योग्यता है कृष्ण चेतना, जो कोई भी व्यक्ति प्राप्त कर सकता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥