उच्च, मध्यम और निम्न वर्ग के गृहस्थ विभिन्न प्रकार के इंद्रिय सुखों से जुड़ जाते हैं। हालाँकि, किसी भी आर्थिक या सामाजिक वर्ग में, यह याद रखना चाहिए कि सभी भौतिक सुख, यहाँ या अगले जन्म में, अस्थायी और अंततः व्यर्थ हैं। एक ज़िम्मेदार गृहस्थ को अपने परिवार के सदस्यों और अन्य आश्रितों को वापस घर, वापस भगवान के पास, आनंद और ज्ञान के शाश्वत जीवन के लिए मार्गदर्शन करना चाहिए। व्यक्ति को थोड़ी देर के लिए एक झूठा और घमंडी राजा नहीं बनना चाहिए, क्योंकि तब वह अपने परिवार के सदस्यों के साथ, जन्म और मृत्यु के चक्र में बंधा रहेगा।
