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bhagavat 11.17.5-6: हे अच्युत, इस पृथ्वी पर या ब्रह्मा की सभा तक में, परम धार्मिक नियमों का आपके सिवा कोई ऐसा वक्ता, स्रष्टा तथा रक्षक नहीं है जहाँ साक्षात् वेद निवास करते हैं। इस तरह हे मधुसूदन, जब आध्यात्मिक ज्ञान के स्रष्टा, रक्षक तथा प्रवक्ता आप ही पृथ्वी का परित्याग कर देंगे, तो इस विनष्ट ज्ञान को फिर से कौन बतलायेगा?   |   bhagavat अध्याय 11.17: भगवान् कृष्ण द्वारा वर्णाश्रम प्रणाली का वर्णन   ।   bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 17: भगवान् कृष्ण द्वारा वर्णाश्रम प्रणाली का वर्णन  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  11.17.5-6 
वक्ता कर्ताविता नान्यो धर्मस्याच्युत ते भुवि ।
सभायामपि वैरिञ्च्यां यत्र मूर्तिधरा: कला: ॥ ५ ॥
कर्त्रावित्रा प्रवक्त्रा च भवता मधुसूदन ।
त्यक्ते महीतले देव विनष्टं क: प्रवक्ष्यति ॥ ६ ॥
 
 
अनुवाद
हे अच्युत, इस पृथ्वी पर या ब्रह्मा की सभा तक में, परम धार्मिक नियमों का आपके सिवा कोई ऐसा वक्ता, स्रष्टा तथा रक्षक नहीं है जहाँ साक्षात् वेद निवास करते हैं। इस तरह हे मधुसूदन, जब आध्यात्मिक ज्ञान के स्रष्टा, रक्षक तथा प्रवक्ता आप ही पृथ्वी का परित्याग कर देंगे, तो इस विनष्ट ज्ञान को फिर से कौन बतलायेगा?
 
O Acyuta, there is no speaker, creator and protector of the supreme religious rules except you, either on this earth or even in the assembly of Brahma where the Vedas themselves reside. Thus, O Madhusudana, when you, the creator, protector and propagator of spiritual knowledge, abandon this earth, then who will tell this lost knowledge again?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)