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bhagavat 11.17.46: जो राजा अपने राज्य में से सारे पापों को हटाकर अपनी और अपनी प्रजा के पापों का नाश करके रक्षा करता है, वह इन्द्र देव के साथ सूर्य के समान तेजस्वी विमान में सुख प्राप्त करता है।   |   bhagavat अध्याय 11.17: भगवान् कृष्ण द्वारा वर्णाश्रम प्रणाली का वर्णन   ।   bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 17: भगवान् कृष्ण द्वारा वर्णाश्रम प्रणाली का वर्णन  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  11.17.46 
एवंविधो नरपतिर्विमानेनार्कवर्चसा ।
विधूयेहाशुभं कृत्‍स्‍नमिन्द्रेण सह मोदते ॥ ४६ ॥
 
 
अनुवाद
जो राजा अपने राज्य में से सारे पापों को हटाकर अपनी और अपनी प्रजा के पापों का नाश करके रक्षा करता है, वह इन्द्र देव के साथ सूर्य के समान तेजस्वी विमान में सुख प्राप्त करता है।
 
The king who removes all the sins from his kingdom and protects himself and all his subjects, certainly enjoys happiness with Indra in a plane as bright as the Sun.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)