आईह यस्य हरिर्दास्ये
कर्मना मनसा गिरा
निर्खिलास्व अपि अवस्थासु
जीवन मुक्तः स उच्यते
"जो व्यक्ति कृष्ण भावना (अथवा अन्य शब्दों में, कृष्ण की सेवा) में अपने शरीर, मन, बुद्धि और वाणी से कार्य करता है, भौतिक संसार में रहते हुए भी वह एक मुक्त व्यक्ति है, चाहे वह अनेकों तथाकथित भौतिक क्रियाकलापों में लगा क्यों न हो।"
