जो ब्रह्मचारी अपनी वैदिक शिक्षा पूरी कर लेता है, और गृहस्थ जीवन में प्रवेश करना चाहता है, उसे चाहिए कि वह गुरु को उचित दक्षिणा दे। फिर स्नान करे, अपने बाल कटवाए और उचित वस्त्र पहने। उसके बाद गुरु से अनुमति लेकर अपने घर को जाए।
A brahmacari who wants to enter the householder's life after completing his Vedic education should give proper remuneration (Guru-dakshina) to the Guru, take a bath, cut hair and wear proper clothes etc. Then, with the permission of his Guru, he should go to his home.
तात्पर्य
हिंदी - अनुवाद: यह पद उस प्रक्रिया का वर्णन करता है जिसे समा-वर्तन कहा जाता है, या आध्यात्मिक गुरु के आश्रम में वैदिक शिक्षा पूरी करने के बाद घर लौटना। जो व्यक्ति अपनी सभी इच्छाओं को भगवान की भक्ति सेवा में केंद्रित नहीं कर सकता है वह गृहस्थ जीवन की ओर आकर्षित होता है, और यदि इस आकर्षण को विनियमित नहीं किया जाता है, तो व्यक्ति गिर जाएगा। कर्म प्रधान गतिविधियों और मानसिक अटकलों की अज्ञानता से ढंके होने के कारण, एक जीव परम भगवान की भक्ति सेवा के बाहर आनंद की तलाश करता है और एक गैर-भक्त बन जाता है। पारिवारिक जीवन लेने वाले को अपने आध्यात्मिक दृढ़ संकल्प के पतन से बचने के लिए वैदिक नियमों और विनियमों का कठोरता से पालन करना चाहिए। जो महिलाओं के साथ अंतरंग इंद्रिय संतुष्टि का आनंद लेता है, उसे दूसरों के साथ अपने व्यवहार में दोमुंहा बनना चाहिए और परिणामस्वरूप सरल, शुद्ध जीवन के मंच से गिर जाता है। जब मन वासना से परेशान होता है, तो व्यक्ति सर्वोच्च व्यक्ति भगवान और उसके शुद्ध भक्त के प्रति समर्पण के सिद्धांत का विरोध करना शुरू कर देता है, और उसकी आक्रामक मानसिकता के काले बादल आध्यात्मिक ज्ञान के प्रकाश को पूरी तरह से ढक देते हैं। व्यक्ति को किसी शुद्ध भक्त के चरण कमलों की सेवा करके किसी से प्यार करने की अपनी प्रवृत्ति को समन्वयित करना चाहिए। जैसा कि वैदिक साहित्य में कहा गया है, "जो गोविंद, भगवान कृष्ण की पूजा करता है, लेकिन उनके भक्तों की पूजा नहीं करता है, उसे उन्नत वैष्णव नहीं माना जाना चाहिए; बल्कि, उसे एक अभिमानी पाखंडी माना जाना चाहिए।"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥