जो विवाहित नहीं हैं, जैसे संन्यासी, वानप्रस्थ और ब्रह्मचारी, उन्हें स्त्रियों के साथ देखभाल, स्पर्श, बातचीत, चुटकुले या खेलकूद में कभी शामिल नहीं होना चाहिए। साथ ही, उन्हें उन प्राणियों के साथ भी कभी संगति नहीं करनी चाहिए जो यौन संबंधों में लगे हुए हों।
Those who are not married i.e. Sanyasis, Vanaprasthas and Brahmacharis should never associate with women by looking at them, touching them, talking to them, laughing or joking with them or playing with them. Nor should they keep company with any being who is having sexual intercourse.
तात्पर्य
प्राणिनः ये सभी जीवन-स्वरूपों को इंगित करता है, चाहे वो पक्षी हो, मधुमक्खियाँ हों या मानवीय सत्ता। अधिकांश जीवन प्रजातियों के मध्य, यौन-संबंध विभिन्न संभोग क्रियाओं से पहले होता है। मानव समाज में, सभी प्रकार के मनोरंजन (पुस्तकें, संगीत, फ़िल्म) और सभी मनोरंजन स्थल (रेस्तरां, शॉपिंग सेंटर, रिसॉर्ट) का उद्देश्य यौन-उत्तेजना को बढ़ावा देना और “रोमांस” का माहौल बनाना होता है। वह जो विवाहित नहीं है — एक सन्यासी, ब्रह्मचर्य या वानप्रस्थ — को कठोरता से यौन संबंधी किसी भी चीज से दूर रहना चाहिए और निश्चित तौर पर कभी किसी जीवन-स्वरूप को यौन संबंध के विविध चरणों में शामिल नहीं देखना चाहिए, चाहे वो पक्षी हो, कीट हो या मनुष्य हो। जब एक पुरुष किसी स्त्री से मजाक करता है, तुरंत एक घनिष्ठ, यौनपूर्ण वातावरण निर्मित हो जाता है और इसको भी ध्यान से बचना चाहिए उन लोगों को जो ब्रह्मचर्य का आचरण करने की आकांक्षा रखते हैं। यहाँ तक कि एक गृहस्थ जो इस तरह की गतिविधियों से जुड़ता है, वह भी अज्ञानता के अँधेरे में गिर जाएगा।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥