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bhagavat 11.17.3-4: हे प्रभु, हे बलिष्ठ भुजाओं वाले, आपने पूर्व में भगवान हंस के रूप में ब्रह्मा जी को धार्मिक सिद्धांत बताए थे जो अभ्यासकर्ता के लिए परम सुखदायी हैं। हे माधव, अब काफी समय बीत चुका है और हे शत्रुओं के नाश करने वाले, जो उपदेश आपने पहले दिए थे, वे शीघ्र ही समाप्त हो जाएँगे।   |   bhagavat अध्याय 11.17: भगवान् कृष्ण द्वारा वर्णाश्रम प्रणाली का वर्णन   ।   bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 17: भगवान् कृष्ण द्वारा वर्णाश्रम प्रणाली का वर्णन  »  श्लोक 3-4
 
 
श्लोक  11.17.3-4 
पुरा किल महाबाहो धर्मं परमकं प्रभो ।
यत्तेन हंसरूपेण ब्रह्मणेऽभ्यात्थ माधव ॥ ३ ॥
स इदानीं सुमहता कालेनामित्रकर्शन ।
न प्रायो भविता मर्त्यलोके प्रागनुशासित: ॥ ४ ॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु, हे बलिष्ठ भुजाओं वाले, आपने पूर्व में भगवान हंस के रूप में ब्रह्मा जी को धार्मिक सिद्धांत बताए थे जो अभ्यासकर्ता के लिए परम सुखदायी हैं। हे माधव, अब काफी समय बीत चुका है और हे शत्रुओं के नाश करने वाले, जो उपदेश आपने पहले दिए थे, वे शीघ्र ही समाप्त हो जाएँगे।
 
O Lord, O strong-armed one, Thou hast earlier in Thy swan form explained to Brahmā the religious principles which bestow the highest bliss on the practitioner. O Madhava, much time has passed since then, and the advice Thou hadst given earlier, O subduer of enemies, will soon lose its value.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)