Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 11.17.26: शुद्ध और स्थिर चेतना में ब्रह्मचारी को अग्निदेव, सूर्य, आचार्य, गाय, ब्राह्मण, गुरु, आदरणीय बुजुर्गों और देवताओं की पूजा करनी चाहिए। उसे सूर्योदय और सूर्यास्त के समय मौन होकर उपयुक्त मंत्रों का उच्चारण करना चाहिए और साथ ही उनका मनन भी करना चाहिए। | bhagavat अध्याय 11.17: भगवान् कृष्ण द्वारा वर्णाश्रम प्रणाली का वर्णन । bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शुद्ध और स्थिर चेतना में ब्रह्मचारी को अग्निदेव, सूर्य, आचार्य, गाय, ब्राह्मण, गुरु, आदरणीय बुजुर्गों और देवताओं की पूजा करनी चाहिए। उसे सूर्योदय और सूर्यास्त के समय मौन होकर उपयुक्त मंत्रों का उच्चारण करना चाहिए और साथ ही उनका मनन भी करना चाहिए।
A brahmacārī should worship Agni, the Sun, the Acharya, the cows, the Brahmins, the Guru, the elders and the Gods with a pure and steady consciousness. He should perform such worship at sunrise and sunset by silently reciting the appropriate mantras.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥