Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 11.17.25: ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करनेवाले को कभी भी वीर्यपात नहीं करना चाहिए। अगर कभी अनजाने में वीर्य निकल जाए, तो ब्रह्मचारी को तुरंत नहा लेना चाहिए, प्राणायाम के जरिए अपने सांसों को रोकना चाहिए और गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए। | bhagavat अध्याय 11.17: भगवान् कृष्ण द्वारा वर्णाश्रम प्रणाली का वर्णन । bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करनेवाले को कभी भी वीर्यपात नहीं करना चाहिए। अगर कभी अनजाने में वीर्य निकल जाए, तो ब्रह्मचारी को तुरंत नहा लेना चाहिए, प्राणायाम के जरिए अपने सांसों को रोकना चाहिए और गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए।
While observing the vow of celibacy, he should never ejaculate. If by chance the semen comes out on its own, then the celibate should immediately take a bath in water, hold his breath by pranayama and chant the Gayatri Mantra.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥