स्नानभोजनहोमेषु जपोच्चारे च वाग्यत: ।
न च्छिन्द्यान्नखरोमाणि कक्षोपस्थगतान्यपि ॥ २४ ॥
अनुवाद
ब्रह्मचारी को हमेशा स्नान, भोजन, यज्ञ, जप या मल-मूत्र त्याग के समय मौन रहना चाहिए। उसे अपने नाखूनों और बगल और जघन के बालों सहित किसी भी अंग के बाल नहीं काटने चाहिए।
A Brahmachari should always remain silent while bathing, eating, performing a yajna, chanting or excreting urine or stool. He should not cut his nails and hair of any part of his body including armpits and genitals.
तात्पर्य
नारद मुनि श्रीमद भागवत के सातवें काण्ड के बारहवें अध्याय में वैदिक ब्रह्मचारी जीवन का इसी प्रकार का विवरण देते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥