ब्राह्मणों, गायों, देवताओं और अन्य पूजनीय हस्तियों बिना किसी पाखंड के सेवा करना, और ऐसी सेवा से जो भी कमाई हो उससे पूर्ण संतुष्ट रहना—ये शूद्रों के प्राकृतिक गुण हैं।
Sincere service to brahmanas, cows, gods and other revered persons and complete satisfaction from whatever income one gets by rendering such service are the natural qualities of shudras.
तात्पर्य
जब पूरा सामाजिक व्यवस्था वैदिक मानकों के अनुसार सही ढंग से फंक्शन करती है, तब सभी खुश और संतुष्ट रहते हैं। वैसे तो शूद्रों को अपनी सेवा के माध्यम से प्राप्त हुई जो भी इनकम है, उससे उन्हें संतुष्ट रहना चाहिए, लेकिन उन्हें कभी भी जीवन की जरूरतों की कमी नहीं होती है, क्योंकि समाज के अन्य वर्ग जैसे क्षत्रिय और वैश्य को पर्याप्त रूप से उदार रहने की आवश्यकता होती है, और ब्राह्मण सबसे अधिक दयालु होने के लिए जाने जाते हैं। इसलिए, यदि सभी सामाजिक वर्ग वैदिक आदेशों का पालन करते हैं, तो कृष्ण भक्ति के मार्गदर्शन में पूरे मानव समाज के लिए एक नया और आनंदित जीवन होगा।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥