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bhagavat 11.17.16: शांति, संयम, तप, स्वच्छता, संतोष, सहनशीलता, स्वाभाविक स्पष्टता, मेरे प्रति समर्पण, दया और सच्चाई ये ब्राह्मणों के स्वभाव के गुण हैं।   |   bhagavat अध्याय 11.17: भगवान् कृष्ण द्वारा वर्णाश्रम प्रणाली का वर्णन   ।   bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 17: भगवान् कृष्ण द्वारा वर्णाश्रम प्रणाली का वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  11.17.16 
शमो दमस्तप: शौचं सन्तोष: क्षान्तिरार्जवम् ।
मद्भ‍‍क्तिश्च दया सत्यं ब्रह्मप्रकृतयस्त्विमा: ॥ १६ ॥
 
 
अनुवाद
शांति, संयम, तप, स्वच्छता, संतोष, सहनशीलता, स्वाभाविक स्पष्टता, मेरे प्रति समर्पण, दया और सच्चाई ये ब्राह्मणों के स्वभाव के गुण हैं।
 
Peace, self-control, penance, purity, contentment, tolerance, easy frankness, devotion to Me, mercy and truth – these are the natural qualities of Brahmins.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)