श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 16: भगवान् की विभूतियाँ  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  11.16.7 
ज्ञात्वा ज्ञातिवधं गर्ह्यमधर्मं राज्यहेतुकम् ।
ततो निवृत्तो हन्ताहं हतोऽयमिति लौकिक: ॥ ७ ॥
 
 
अनुवाद
कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि पर, अर्जुन ने सोचा कि अपने रिश्तेदारों को मारना एक निन्दनीय और अधार्मिक कृत्य होगा, जो केवल राज्य प्राप्त करने की उसकी इच्छा से प्रेरित होगा। इसलिए वह युद्ध से अलग हो जाना चाहता था, यह सोचकर कि, "मैं अपने रिश्तेदारों का हत्यारा हो जाऊँगा, और वे नष्ट हो जाएँगे।" इस तरह वह सांसारिक चेतना से दुखी था।
 
On the battlefield of Kurukshetra, Arjuna thought that killing his relatives was a very shameful and unrighteous act, which was motivated by his desire to acquire the kingdom. Therefore, thinking that I will be the killer of my relatives and they will be destroyed, he wanted to abstain from fighting. Thus he was distressed by worldly consciousness.
तात्पर्य
भगवान कृष्ण ने यहाँ उद्धव को वह परिस्थितियाँ बताई हैं जिनमें श्री अर्जुन ने अपने प्रश्न पूछे थे
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)