या: काश्च भूमौ दिवि वै रसायां
विभूतयो दिक्षु महाविभूते ।
ता मह्यमाख्याह्यनुभावितास्ते
नमामि ते तीर्थपदाङ्घ्रिपद्मम् ॥ ५ ॥
अनुवाद
हे सर्वशक्तिमान प्रभु, कृपा करके मुझे अपनी वे अनगिनत शक्तियाँ बतलायें जिन्हें आप पृथ्वी, स्वर्ग, नरक और सभी दिशाओं में प्रकट करते हैं। मैं आपके उन चरणकमलों को नमन करता हूँ जो समस्त तीर्थस्थलों के आश्रय हैं।
O Almighty Lord, kindly reveal to me Your innumerable powers which You manifest on earth, in heaven, in hell and in all directions. I offer my respectful obeisances unto Your lotus feet which are the shelter of all holy places.
तात्पर्य
उद्धव ने यहाँ भगवान की भौतिक और आध्यात्मिक क्षमताओं के बारे में पूछताछ की, जैसा कि हमारे ब्रह्मांड में प्रकट होता है। जैसे मानव शहरों में रहने वाले साधारण पशु या कीड़े मनुष्य की वैज्ञानिक, सांस्कृतिक या सैन्य उपलब्धियों की सराहना नहीं कर सकते, वैसे ही मूर्ख भौतिकवादी भगवान की महान मात्रा की सराहना नहीं कर सकते, यहाँ तक कि वे जो हमारे ब्रह्मांड में प्रकट होते हैं। सामान्य मनुष्यों की सराहना के लिए उद्धव भगवान से विनती करते हैं कि वह ठीक से प्रकट करें कि कैसे और किन रूपों में उन्होंने अपनी शक्तियों का विस्तार किया। जैसा कि पहले ही बताया गया है, भगवान सभी अस्तित्व के आवश्यक तत्व हैं, और इसलिए किसी भी शक्तिशाली या समृद्ध अभिव्यक्ति को अंततः स्वयं भगवान पर निर्भर रहना चाहिए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥