मेरे शरणागत होकर मनुष्य को अपनी वाणी, मन और प्राण पर नियंत्रण रखना चाहिए। उसके बाद, भक्तिमयी बुद्धि के द्वारा वह अपने जीवन के लक्ष्य को पूरी तरह से पूरा कर सकेगा।
By surrendering to Me, man should control his speech, mind and life, and then with the help of devotional wisdom, he will be able to fulfil his goal in life.
तात्पर्य
ब्राह्मण दीक्षा के समय दिए गए ब्रह्म-गायत्री मंत्र का सही-सही जाप करके प्रेमपूर्ण भक्तियुक्त बुद्धि का विकास कर सकते हैं। स्पष्ट बुद्धि द्वारा, व्यक्ति स्वाभाविक रूप से और सहज ही मानसिक अटकलों और फलों की गतिविधियों द्वारा प्रस्तावित पुरस्कारों में कोई रुचि नहीं लेता है और ईश्वर के पूर्ण व्यक्तित्व का आश्रय लेता है।
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध ग्यारह के अंतर्गत सोलहवाँ अध्याय समाप्त होता है ।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥