श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 16: भगवान् की विभूतियाँ  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  11.16.29 
वासुदेवो भगवतां त्वं तु भागवतेष्वहम् ।
किम्पुरुषाणां हनुमान् विद्याध्राणां सुदर्शन: ॥ २९ ॥
 
 
अनुवाद
भगवान नाम के अधिकारी में मैं वासुदेव हूँ और यथावत हे उद्धव, तुम भक्तों में मेरे प्रतिनिधि हो। मैं किम्पुरुषों में हनुमान हूँ और विद्याधरों में सुदर्शन हूँ।
 
Among those who bear the name of the Lord I am Vasudeva, and O Uddhava, you undoubtedly represent me among the devotees. I am Hanuman among the Kimpurushas and Sudarshan among the Vidyadharas.
तात्पर्य
वैदिक साहित्य में कहा गया है कि जो व्यक्ति सभी सत्ताओं के सृजन और विनाश के बारे में पूर्ण ज्ञान रखता है और जो सर्वज्ञता में पूर्ण रूप से स्थित है, उसे भगवान भगवान के सर्वोच्च व्यक्तित्व के रूप में जाना जाता है। हालाँकि कई महान व्यक्तित्वों को कभी-कभी भगवान कहा जाता है, लेकिन अंततः भगवान एक सर्वोच्च सत्ता है जिसके पास असीमित वैभव है। पूरे इतिहास में, कई महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों को "भगवान" के रूप में संबोधित किया गया है, लेकिन अंततः केवल एक ही सर्वोच्च भगवान है। भगवान के चतुर-व्यहा, या चौगुनी विस्तार में, पहली अभिव्यक्ति वाशुदेव है, जो यहाँ विष्णु-तत्व श्रेणी में भगवान के सभी विस्तार का प्रतिनिधित्व करता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)