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bhagavat 11.16.28: समस्त युगों में मैं सत्युग हूँ, और स्थिर मुनियों में देवल तथा असित हूँ। वेदों का विभाजन करने वालों में मैं कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास हूँ, और विद्वानों में मैं आध्यात्मिक विज्ञान के ज्ञाता शुक्राचार्य हूँ।   |   bhagavat अध्याय 11.16: भगवान् की विभूतियाँ   ।   bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 16: भगवान् की विभूतियाँ  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  11.16.28 
अहं युगानां च कृतं धीराणां देवलोऽसित: ।
द्वैपायनोऽस्मि व्यासानां कवीनां काव्य आत्मवान् ॥ २८ ॥
 
 
अनुवाद
समस्त युगों में मैं सत्युग हूँ, और स्थिर मुनियों में देवल तथा असित हूँ। वेदों का विभाजन करने वालों में मैं कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास हूँ, और विद्वानों में मैं आध्यात्मिक विज्ञान के ज्ञाता शुक्राचार्य हूँ।
 
Among the Yugas I am Satya Yuga and among the stable sages I am Deval and Asit. Among the ones who divided the Vedas I am Krishna Dwaipayana Vedavyasa and among the learned I am Shukracharya, the knower of spiritual science.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)