श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 16: भगवान् की विभूतियाँ  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  11.16.26 
धर्माणामस्मि संन्यास: क्षेमाणामबहिर्मति: ।
गुह्यानां सुनृतं मौनं मिथुनानामजस्त्वहम् ॥ २६ ॥
 
 
अनुवाद
धार्मिक सिद्धांतों में मैं त्याग हूँ और सुरक्षा में मैं अंतर्निहित सनातन आत्मा की चेतना हूँ। रहस्यों में मैं मधुर वाणी और मौन हूँ, और जोड़े में मैं ब्रह्मा हूँ।
 
In religious principles I am renunciation and in all kinds of security I am the consciousness of the eternal soul. In mysteries I am sweet voice and silence and in couples having sexual intercourse I am Brahma.
तात्पर्य
जो अपने अंदर निवास करने वाली शाश्वत आत्मा का बोध कर लेता है, अब वह किसी भी भौतिक परिस्थिति से नहीं डरता है और इस प्रकार वह जीवन के त्यागी आदेश को स्वीकार करने के लिए योग्य हो जाता है। निश्चित रूप से भय भौतिक जीवन के महान दुखों में से एक है। इसलिए निडरता का उपहार बहुत मूल्यवान है और भगवान कृष्ण का प्रतिनिधित्व करता है। सामान्य सुखद भाषण और मौन दोनों में बहुत कम गोपनीय चीजें प्रकट होती हैं और इस प्रकार कूटनीति और मौन दोनों ही गोपनीयता के साधन हैं। भगवान ब्रह्मा यौन जोड़ों में प्रमुख हैं क्योंकि मूल सुंदर युगल स्वायंभुव मनु और शतरूपा, भगवान ब्रह्मा के शरीर से प्रकट हुए थे, जैसा कि श्रीमद् भागवतम् के तीसरे कांड के बारहवें अध्याय में बताया गया है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)