Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
bhagavat 11.16.23: यज्ञों में मैं वेदाध्ययन का ज्ञान हूँ, और व्रतों में मैं अहिंसा हूँ। सभी शुद्ध करने वाली वस्तुओं में मैं वायु हूँ, अग्नि हूँ, सूर्य हूँ, जल हूँ और वाणी हूँ।   |   bhagavat अध्याय 11.16: भगवान् की विभूतियाँ   ।   bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 16: भगवान् की विभूतियाँ  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  11.16.23 
यज्ञानां ब्रह्मयज्ञोऽहं व्रतानामविहिंसनम् ।
वाय्वग्‍न्यर्काम्बुवागात्मा शुचीनामप्यहं शुचि: ॥ २३ ॥
 
 
अनुवाद
यज्ञों में मैं वेदाध्ययन का ज्ञान हूँ, और व्रतों में मैं अहिंसा हूँ। सभी शुद्ध करने वाली वस्तुओं में मैं वायु हूँ, अग्नि हूँ, सूर्य हूँ, जल हूँ और वाणी हूँ।
 
In sacrifices I am the study of Vedas and in fasts I am non-violence. In all purifying things I am the air, fire, sun, water and speech.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)