हे प्रभु, हालाँकि दुष्ट लोगों के लिए यह समझना कठिन है कि आप सभी श्रेष्ठ और निम्न रचनाओं में स्थित हैं, परंतु वे ब्राह्मण जो वास्तव में वैदिक निष्कर्षों को जानते हैं, वे यथार्थ में आपकी आराधना करते हैं।
O Lord, although it is difficult for impure people to understand that You are situated in all the higher and lower creations, the brahmins who know the Vedic doctrine well worship You in Your true form.
तात्पर्य
सन्तजनो का व्यवहार भी प्रमाण है, और इसलिये यहाँ कहा गया है कि अज्ञानी, अधर्मी जन प्रभु के सर्वव्यापि रूप से विमोहित तो होते ही हैं, परन्तु जिनका सत्व शुद्ध है और चित्त निर्मल है, वे प्रभु का यथारूप से दर्शन पाते हैं। इस अध्याय में श्री उद्धव प्रभु की सम्पदाओं के विषय में पूछते हैं, और यहाँ उच्चावाचेषु भूतेषु शब्द से स्पष्ट ही प्रभु को बाह्य सम्पदाओं ले करके पूछा गया है, जो सांसारिक सृष्टि में प्रकट है। वैष्णव सन्त ब्राह्मण सभी वस्तुओं में प्रभु श्री कृष्ण का दर्शन करते हैं, फिर भी उनकी सृष्टि की विविधता को पहचानते हैं। उदाहरणार्थ, विग्रह भगवान् की पूजा के समय भक्त भगवान् के विग्रह रूप को सुशोभित करने के लिये सबसे अच्छे फूल, फल और आभूषण चुनेंगे। इसी प्रकार, यद्यपि भगवान् प्रत्येक बद्ध जीव के हृदय में विराजमान हैं, फिर भी भक्त प्रभु श्री कृष्ण के सन्देश में रूचि रखने वाले बद्ध जीव पर अधिक ध्यान देंगे। यद्यपि भगवान् सर्वव्यापी हैं, फिर भी भक्त प्रभु की सेवा के लिये उनकी उच्चा और अवचेष सृष्टियों में निवास के विषय में कुछ भेद करते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥