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bhagavat 11.16.12: वेदों में मैं उनके मूल अध्यापक ब्रह्मा हूँ, और सभी मंत्रों में मैं त्रि-अक्षरीय ॐ हूँ। अक्षरों में मैं पहला अक्षर "अ" हूँ, और पवित्र छंदों में मैं गायत्री मंत्र हूँ।   |   bhagavat अध्याय 11.16: भगवान् की विभूतियाँ   ।   bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 16: भगवान् की विभूतियाँ  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  11.16.12 
हिरण्यगर्भो वेदानां मन्त्राणां प्रणवस्‍त्रिवृत् ।
अक्षराणामकारोऽस्मि पदानिच्छन्दसामहम् ॥ १२ ॥
 
 
अनुवाद
वेदों में मैं उनके मूल अध्यापक ब्रह्मा हूँ, और सभी मंत्रों में मैं त्रि-अक्षरीय ॐ हूँ। अक्षरों में मैं पहला अक्षर "अ" हूँ, और पवित्र छंदों में मैं गायत्री मंत्र हूँ।
 
In the Vedas I am the original teacher Brahma and in all mantras I am the Omkar with three letters (matras). Among letters I am the first letter A (akaar) and among sacred verses I am the Gayatri Mantra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)