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bhagavat 11.16.10: मैं उन्नति चाहने वालों की परम उपलब्धि हूँ, और नियंत्रण रखना चाहने वालों में मेरा समय है। मैं भौतिक गुणों के संतुलन की स्थिति हूँ और धार्मिकों में मैं सहज गुण हूँ।   |   bhagavat अध्याय 11.16: भगवान् की विभूतियाँ   ।   bhagavat स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 11: सामान्य इतिहास  »  अध्याय 16: भगवान् की विभूतियाँ  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  11.16.10 
अहं गतिर्गतिमतां काल: कलयतामहम् ।
गुणानां चाप्यहं साम्यं गुणिन्यौत्पत्तिको गुण: ॥ १० ॥
 
 
अनुवाद
मैं उन्नति चाहने वालों की परम उपलब्धि हूँ, और नियंत्रण रखना चाहने वालों में मेरा समय है। मैं भौतिक गुणों के संतुलन की स्थिति हूँ और धार्मिकों में मैं सहज गुण हूँ।
 
I am the ultimate destination of those who seek progress and I am time among those who want to control. I am the equilibrium of material qualities and I am the natural quality among the pure.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)