श्रील जीव गोस्वामी कहते हैं कि व्यक्ति को भगवान के आध्यात्मिक स्वरूप पर ध्यान करना चाहिए, जो किसी भी भौतिक पदनाम से मुक्त है । योग व्यवस्था में आगे बढ़ने का यही सार है; इस प्रकार व्यक्ति भगवान के व्यक्तिगत शरीर से सभी रहस्यमय सिद्धियाँ बहुत आसानी से प्राप्त कर लेता है ।
