भक्तिस्त्वयि स्थिरतरा भगवन् यदी स्याद्
दैवेन नः फलति दिव्य-किशोर-मूर्तिः
मुक्तिः स्वयं मुकुलितांजलिः सेवतेऽस्मान्
धर्मार्थकामगतिायः समयप्रतीक्षाः
"हे मेरे प्रभु, यदि हम आपके प्रति अडिग भक्ति सेवा विकसित करते हैं, तो स्वचालित रूप से आपका दिव्य, युवा रूप हमारे सामने प्रकट होता है। इस प्रकार मुक्ति स्वयं हाथ जोड़े हमारी सेवा करने के लिए प्रतीक्षा करती है, और धार्मिकता, आर्थिक विकास और संवेदी संतुष्टि के अंतिम लक्ष्य धैर्यपूर्वक हमारी सेवा करने के लिए प्रतीक्षा करते हैं।"
