भगवान जी ने कहा: योग जानने वाले विशेषज्ञों ने घोषित किया है कि योग-सिद्धि और ध्यान के अठारह प्रकार होते हैं। जिनमें आठ मुख्य होते हैं और वे मुझमें ही आश्रित रहते हैं। और दस गौण होते हैं, जो सतोगुण से प्रकट होते हैं।
The Lord said: The adepts of Yoga have declared that there are eighteen types of yogic attainments and meditation, of which eight are main, which are under My control, and ten are secondary, which arise from the mode of goodness.
तात्पर्य
श्रीला विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर इस प्रकार शब्द मत प्रधानाः की व्याख्या करते हैं। भगवान कृष्ण प्राकृतिक रूप से आठ प्राथमिक रहस्यमय शक्तियों और ध्यान के आश्रय हैं क्योंकि ऐसी सिद्धियाँ भगवान की व्यक्तिगत शक्ति से प्रकट होती हैं और इस प्रकार वे पूरी तरह से केवल भगवान खुद में और भगवान के व्यक्तिगत सहयोगियों के भीतर ही विकसित होती हैं। जब भौतिकवादी व्यक्ति यांत्रिक रूप से ऐसी शक्तियों को प्राप्त करते हैं तो उन्हें मिलने वाली सिद्धियाँ निम्न स्तर की होती हैं और इन्हें माया, भ्रम की अभिव्यक्ति माना जाता है। भगवान का एक शुद्ध भक्त स्वतः ही भगवान से उनकी भक्ति सेवा को निष्पादित करने के लिए अद्भुत शक्तियाँ प्राप्त करता है। यदि इंद्रिय संतुष्टि के लिए कोई यांत्रिक रूप से रहस्यमय सिद्धियों को प्राप्त करने का प्रयास करता है, तो इन सिद्धियों को निश्चित रूप से भगवान की बाहरी शक्ति के निम्न विस्तार के रूप में माना जाता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥